फ़ंक्शन, इन्जेक्टिविटी, सर्जेक्टिविटी, इन्भर्स और पीरियोडिक फ़ंक्शन की सम्पूर्ण गाइड

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Source: YouTube video by JEE WallahWatch original video

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परिचय

  • इस लेख में फ़ंक्शन की बुनियादी परिभाषा से लेकर इन्जेक्टिव‑सर्जेक्टिव गुण, इन्भर्स, कंपोज़िट और पीरियोडिक फ़ंक्शन तक सभी प्रमुख अवधारणाओं को एक साथ समझाया गया है।
  • JEE‑Main/Advanced की परीक्षा में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के उदाहरण भी शामिल हैं।

1. फ़ंक्शन क्या है?

  • परिभाषा: दो सेट A और B के बीच ऐसा नियम जिससे प्रत्येक a∈A को ठीक एक b∈B से जोड़ा जाता है (एक‑से‑एक मैपिंग)।
  • दो शर्तें: (i) हर a का बाइंडिंग, (ii) यूनिकनेस।
  • लिखावट: f:A→B या f(a)=b.

2. इमेज और प्री‑इमेज

  • इमेज: f(a) या f[a] – किसी इनपुट का आउटपुट।
  • प्री‑इमेज: f⁻¹(b) या f⁻¹[b] – वह सभी a जिनके लिये f(a)=b.

3. डोमेन, कोडोमेन और रेंज

  • डोमेन – सभी संभावित इनपुट का सेट।
  • कोडोमेन – सभी संभावित आउटपुट का सेट (Y‑अक्ष)।
  • रेंज – कोडोमेन का वह उप‑सेट जो वास्तव में प्राप्त होता है; हमेशा कोडोमेन का उप‑सेट।
  • उदाहरण: f(x)=x² → डोमेन ℝ, कोडोमेन ℝ, रेंज [0,∞).

4. फ़ंक्शन के प्रमुख प्रकार

प्रकारसामान्य रूपरेंज/विशेषताएँ
पॉलिनॉमियलaₙxⁿ+…+a₀डिग्री विषम → ℝ, डिग्री सम → [minimum,∞)
अल्जेब्रिकपॉलिनॉमियल + रूट/भाजनडिनॉमिनेटर = 0 पर बिंदु हटता है
रैशनलp(x)/q(x)डोमेन = ℝ {roots of q}
एक्स्पोनेन्शियलaˣ (a>0, a≠1)डोमेन ℝ, रेंज (0,∞)
लॉगरिदमिकlogₐx (a>0, a≠1)डोमेन (0,∞), रेंज ℝ
ऐब्सोल्यूट वैल्यूx
फ़्लोर (Greatest Integer)⌊x⌋डोमेन ℝ, रेंज ℤ
फ्रैक्शनल पार्ट{x}=x-⌊x⌋रेंज [0,1)
त्रिकोणमितीयsin, cos, tan …डोमेन में जहाँ डिनॉमिनेटर ≠ 0, रेंज [-1,1] (sin,cos) या ℝ (tan)

5. ग्राफ़िकल टेस्ट

  • वर्टिकल‑लाइन टेस्ट: कोई भी वर्टिकल लाइन ग्राफ़ को अधिकतम दो बिंदुओं से काटे – फ़ंक्शन वैध। दो बिंदु से अधिक → नहीं।
  • हॉरिज़ॉन्टल‑लाइन टेस्ट: यदि कोई हॉरिज़ॉन्टल लाइन दो बिंदुओं से अधिक काटती है तो फ़ंक्शन इन्जेक्टिव नहीं (one‑to‑one नहीं)।

6. निरन्तरता और डिस्कंटिन्यूइटी

  • निरन्तर फ़ंक्शन का ग्राफ़ बिना टूटे चलता है।
  • डिस्कंटिन्यूइटी के प्रकार: होल, जम्प, असिम्प्टोटिक।
  • निरन्तर फ़ंक्शन की रेंज हमेशा एक बंद अंतराल के रूप में लिखी जाती है।

7. इंक्रीज़िंग / डिक्रीज़िंग

  • इंक्रीज़िंग: x₁<x₂ ⇒ f(x₁)<f(x₂).
  • डिक्रीज़िंग: x₁f(x₂).
  • नॉन‑डिक्रीज़िंग: कभी घटता नहीं (जैसे फ़्लोर फ़ंक्शन)।

8. फ़्लोर फ़ंक्शन की विशेषताएँ

  • परिभाषा: ⌊x⌋ = सबसे बड़ा पूर्णांक जो x से ≤ है।
  • गुण: ⌊x⌋ ≤ x < ⌊x⌋+1.
  • फ्रैक्शनल पार्ट: {x}=x-⌊x⌋, रेंज [0,1).
  • हर्माइट पहचान: ⌊x⌋+⌊-x⌋ = -1 (यदि x∉ℤ), 0 (यदि x∈ℤ).

9. फ़ंक्शन का संयोजन और ऑपरेशन

  • जोड़/घटाव/गुणा/भाजन: दोनों फ़ंक्शन के डोमेन‑इंटरसेक्शन पर परिभाषित होना चाहिए; भाग में denominator ≠ 0 होना चाहिए।
  • संयोजन: (f∘g)(x)=f(g(x)) – डोमेन = {x∈Dom(g) | g(x)∈Dom(f)}.

10. इन्जेक्टिव, सर्जेक्टिव, मेनी‑वन, इंटू

  • Injective (One‑to‑One): अलग‑अलग इनपुट अलग‑अलग आउटपुट देते हैं। हॉरिज़ॉन्टल‑लाइन टेस्ट से जाँचें।
  • Surjective (Onto): कोडोमेन का हर तत्व कम से कम एक प्री‑इमेज रखता है।
  • Bijective: दोनों गुण एक साथ – इन्भर्स मौजूद होता है।
  • Many‑One: दो या अधिक इनपुट एक ही आउटपुट देते हैं (जैसे x²)।
  • Into: रेंज कोडोमेन का proper subset है।

11. इन्भर्स फ़ंक्शन

  • केवल बाइजे़क्टिव फ़ंक्शन का इन्भर्स मौजूद होता है।
  • प्रक्रिया: y = f(x) → x = f(y) → y को अलग करें → f⁻¹(x).
  • उदाहरण: f(x)=2x+3 → f⁻¹(x)= (x‑3)/2.

12. कंपोज़िट फ़ंक्शन

  • (g∘f)(x)=g(f(x)).
  • एसोसिएटिव: (h∘g)∘f = h∘(g∘f).
  • यदि f और g दोनों बाइजे़क्टिव हों तो (g∘f)⁻¹ = f⁻¹∘g⁻¹.

13. पीरियोडिक फ़ंक्शन

  • परिभाषा: ऐसा फ़ंक्शन जिसके लिये कोई न्यूनतम T>0 हो जिससे f(x+T)=f(x) सभी x के लिये।
  • फ़ंडामेंटल पीरियोड = सबसे छोटा ऐसा T.
  • उदाहरण: sin x, cos x → 2π; tan x → π.
  • डिस्कंटिन्यूइटी की पुनरावृत्ति: यदि फ़ंक्शन डिस्कंटिन्यूअस है और पीरियोडिक, तो उसकी डिस्कंटिन्यूटीज़ भी हर T पर दोहराती हैं (जैसे tan x के असिम्प्टोटिक)।
  • पीरियोड की गणना: f(ax+b) का पीरियोड = बेस‑फ़ंक्शन का पीरियोड / |a|.
  • इवन पावर (sin²x, cos⁴x) का पीरियोड हमेशा π; ऑड पावर (sin x) का 2π।
  • कई फ़ंक्शन का संयुक्त पीरियोड: यदि T₁ और T₂ रैशनल अनुपात में हों तो LCM(T₁,T₂) नया पीरियोड बनता है; नहीं तो सामान्य पीरियोड नहीं मिलता।

14. ग्राफिकल ट्रांसफ़ॉर्मेशन

  1. शिफ्ट: y = f(x‑a) → बाएँ a इकाई, y = f(x)+b → ऊपर b इकाई।
  2. रिफ्लेक्शन: y = –f(x) (x‑अक्ष), y = f(‑x) (y‑अक्ष)।
  3. स्केलिंग: y = a·f(x) (ऊर्ध्वाधर), y = f(bx) (क्षैतिज)।
  4. इन ट्रांसफ़ॉर्मेशन को समझने से फ़ंक्शन का पीरियोड, डोमेन‑रेंज और ग्राफ़ आसानी से बदलता है।

15. JEE‑स्तर के उदाहरण प्रश्न और समाधान

  • डोमेन‑रेंज: f(x)= (x‑2)/(x+3)·√(9‑x) → डोमेन ((‑∞,‑3)∪(‑3,9]) , रेंज y≥0, y≠1.
  • इन्भर्स: f(x)= (5x+3)/(6x‑5) → f⁻¹(x)= (x+3)/(6x‑5).
  • रेंज: f(x)= x/√(x²+1) → डोमेन ℝ, रेंज (‑1,1).
  • सर्जेक्टिविटी: f(x)= (2x‑3)/(x‑1) → रेंज ℝ{2} → नहीं सर्जेक्टिव।
  • पीरियोड: F(x)=3 sin 2x + 4 cos x → sin 2x का π, cos x का 2π → LCM = 2π.

16. अध्ययन के टिप्स

  • हर परिभाषा, उदाहरण और ग्राफ़ को नोटबुक में लिखें।
  • वीडियो को पॉज़ करके स्वयं प्रश्न हल करें, फिर समाधान देखें।
  • पिछले साल के JEE प्रश्नों को डोमेन‑रेंज, इन्जेक्टिव‑सर्जेक्टिव, पीरियोडिक आदि वर्गों में बाँट कर अभ्यास करें।
  • ग्राफ़ बनाते समय टेबल‑फ़ॉर्म में x‑values और y‑values लिखें, फिर बिंदु जोड़ें; वर्टिकल‑लाइन टेस्ट से तुरंत फ़ंक्शन की वैधता जाँचें।

17. अतिरिक्त संसाधन

  • प्रैक्टिस बुक: "IIT JEE Mathematics – 2024" (पुस्तक) – विस्तृत फ़ंक्शन‑प्रश्न और हल।
  • ग्राफ़िंग टूल: "TI‑84 Plus CE" ग्राफिंग कैलकुलेटर – फ़ंक्शन के ग्राफ़ को तुरंत देख कर वर्टिकल‑लाइन टेस्ट, पीरियोड आदि लागू करने में मदद।
  • समीक्षा गाइड: "Mathematics for JEE Advanced – Arihant" – फ़ंक्शन, डोमेन‑रेंज, greatest‑integer, इन्भर्स और पीरियोडिक फ़ंक्शन पर संक्षिप्त सारांश।

फ़ंक्शन की डोमेन‑रेंज, इन्जेक्टिव‑सर्जेक्टिव गुण, इन्भर्स, कंपोज़िट और पीरियोडिक व्यवहार को पूरी तरह समझना गणितीय समस्या‑समाधान की नींव है; इन सिद्धांतों को ग्राफ़िकल टेस्ट और नियमित अभ्यास के साथ लागू करने से आप JEE‑Main/Advanced के सभी फ़ंक्शन‑आधारित प्रश्नों को आत्मविश्वास के साथ हल कर पाएँगे।

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1. फ़ंक्शन क्या है?

- **परिभाषा**: दो सेट A और B के बीच ऐसा नियम जिससे प्रत्येक a∈A को ठीक एक b∈B से जोड़ा जाता है (एक‑से‑एक मैपिंग)। - दो शर्तें: (i) हर a का बाइंडिंग, (ii) यूनिकनेस। - लिखावट: f:A→B या f(a)=b.

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