फ़ंक्शन, इन्जेक्टिविटी, सर्जेक्टिविटी, इन्भर्स और पीरियोडिक फ़ंक्शन की सम्पूर्ण गाइड
परिचय
- इस लेख में फ़ंक्शन की बुनियादी परिभाषा से लेकर इन्जेक्टिव‑सर्जेक्टिव गुण, इन्भर्स, कंपोज़िट और पीरियोडिक फ़ंक्शन तक सभी प्रमुख अवधारणाओं को एक साथ समझाया गया है।
- JEE‑Main/Advanced की परीक्षा में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के उदाहरण भी शामिल हैं।
1. फ़ंक्शन क्या है?
- परिभाषा: दो सेट A और B के बीच ऐसा नियम जिससे प्रत्येक a∈A को ठीक एक b∈B से जोड़ा जाता है (एक‑से‑एक मैपिंग)।
- दो शर्तें: (i) हर a का बाइंडिंग, (ii) यूनिकनेस।
- लिखावट: f:A→B या f(a)=b.
2. इमेज और प्री‑इमेज
- इमेज: f(a) या f[a] – किसी इनपुट का आउटपुट।
- प्री‑इमेज: f⁻¹(b) या f⁻¹[b] – वह सभी a जिनके लिये f(a)=b.
3. डोमेन, कोडोमेन और रेंज
- डोमेन – सभी संभावित इनपुट का सेट।
- कोडोमेन – सभी संभावित आउटपुट का सेट (Y‑अक्ष)।
- रेंज – कोडोमेन का वह उप‑सेट जो वास्तव में प्राप्त होता है; हमेशा कोडोमेन का उप‑सेट।
- उदाहरण: f(x)=x² → डोमेन ℝ, कोडोमेन ℝ, रेंज [0,∞).
4. फ़ंक्शन के प्रमुख प्रकार
| प्रकार | सामान्य रूप | रेंज/विशेषताएँ |
|---|---|---|
| पॉलिनॉमियल | aₙxⁿ+…+a₀ | डिग्री विषम → ℝ, डिग्री सम → [minimum,∞) |
| अल्जेब्रिक | पॉलिनॉमियल + रूट/भाजन | डिनॉमिनेटर = 0 पर बिंदु हटता है |
| रैशनल | p(x)/q(x) | डोमेन = ℝ {roots of q} |
| एक्स्पोनेन्शियल | aˣ (a>0, a≠1) | डोमेन ℝ, रेंज (0,∞) |
| लॉगरिदमिक | logₐx (a>0, a≠1) | डोमेन (0,∞), रेंज ℝ |
| ऐब्सोल्यूट वैल्यू | x | |
| फ़्लोर (Greatest Integer) | ⌊x⌋ | डोमेन ℝ, रेंज ℤ |
| फ्रैक्शनल पार्ट | {x}=x-⌊x⌋ | रेंज [0,1) |
| त्रिकोणमितीय | sin, cos, tan … | डोमेन में जहाँ डिनॉमिनेटर ≠ 0, रेंज [-1,1] (sin,cos) या ℝ (tan) |
5. ग्राफ़िकल टेस्ट
- वर्टिकल‑लाइन टेस्ट: कोई भी वर्टिकल लाइन ग्राफ़ को अधिकतम दो बिंदुओं से काटे – फ़ंक्शन वैध। दो बिंदु से अधिक → नहीं।
- हॉरिज़ॉन्टल‑लाइन टेस्ट: यदि कोई हॉरिज़ॉन्टल लाइन दो बिंदुओं से अधिक काटती है तो फ़ंक्शन इन्जेक्टिव नहीं (one‑to‑one नहीं)।
6. निरन्तरता और डिस्कंटिन्यूइटी
- निरन्तर फ़ंक्शन का ग्राफ़ बिना टूटे चलता है।
- डिस्कंटिन्यूइटी के प्रकार: होल, जम्प, असिम्प्टोटिक।
- निरन्तर फ़ंक्शन की रेंज हमेशा एक बंद अंतराल के रूप में लिखी जाती है।
7. इंक्रीज़िंग / डिक्रीज़िंग
- इंक्रीज़िंग: x₁<x₂ ⇒ f(x₁)<f(x₂).
- डिक्रीज़िंग: x₁
f(x₂). - नॉन‑डिक्रीज़िंग: कभी घटता नहीं (जैसे फ़्लोर फ़ंक्शन)।
8. फ़्लोर फ़ंक्शन की विशेषताएँ
- परिभाषा: ⌊x⌋ = सबसे बड़ा पूर्णांक जो x से ≤ है।
- गुण: ⌊x⌋ ≤ x < ⌊x⌋+1.
- फ्रैक्शनल पार्ट: {x}=x-⌊x⌋, रेंज [0,1).
- हर्माइट पहचान: ⌊x⌋+⌊-x⌋ = -1 (यदि x∉ℤ), 0 (यदि x∈ℤ).
9. फ़ंक्शन का संयोजन और ऑपरेशन
- जोड़/घटाव/गुणा/भाजन: दोनों फ़ंक्शन के डोमेन‑इंटरसेक्शन पर परिभाषित होना चाहिए; भाग में denominator ≠ 0 होना चाहिए।
- संयोजन: (f∘g)(x)=f(g(x)) – डोमेन = {x∈Dom(g) | g(x)∈Dom(f)}.
10. इन्जेक्टिव, सर्जेक्टिव, मेनी‑वन, इंटू
- Injective (One‑to‑One): अलग‑अलग इनपुट अलग‑अलग आउटपुट देते हैं। हॉरिज़ॉन्टल‑लाइन टेस्ट से जाँचें।
- Surjective (Onto): कोडोमेन का हर तत्व कम से कम एक प्री‑इमेज रखता है।
- Bijective: दोनों गुण एक साथ – इन्भर्स मौजूद होता है।
- Many‑One: दो या अधिक इनपुट एक ही आउटपुट देते हैं (जैसे x²)।
- Into: रेंज कोडोमेन का proper subset है।
11. इन्भर्स फ़ंक्शन
- केवल बाइजे़क्टिव फ़ंक्शन का इन्भर्स मौजूद होता है।
- प्रक्रिया: y = f(x) → x = f(y) → y को अलग करें → f⁻¹(x).
- उदाहरण: f(x)=2x+3 → f⁻¹(x)= (x‑3)/2.
12. कंपोज़िट फ़ंक्शन
- (g∘f)(x)=g(f(x)).
- एसोसिएटिव: (h∘g)∘f = h∘(g∘f).
- यदि f और g दोनों बाइजे़क्टिव हों तो (g∘f)⁻¹ = f⁻¹∘g⁻¹.
13. पीरियोडिक फ़ंक्शन
- परिभाषा: ऐसा फ़ंक्शन जिसके लिये कोई न्यूनतम T>0 हो जिससे f(x+T)=f(x) सभी x के लिये।
- फ़ंडामेंटल पीरियोड = सबसे छोटा ऐसा T.
- उदाहरण: sin x, cos x → 2π; tan x → π.
- डिस्कंटिन्यूइटी की पुनरावृत्ति: यदि फ़ंक्शन डिस्कंटिन्यूअस है और पीरियोडिक, तो उसकी डिस्कंटिन्यूटीज़ भी हर T पर दोहराती हैं (जैसे tan x के असिम्प्टोटिक)।
- पीरियोड की गणना: f(ax+b) का पीरियोड = बेस‑फ़ंक्शन का पीरियोड / |a|.
- इवन पावर (sin²x, cos⁴x) का पीरियोड हमेशा π; ऑड पावर (sin x) का 2π।
- कई फ़ंक्शन का संयुक्त पीरियोड: यदि T₁ और T₂ रैशनल अनुपात में हों तो LCM(T₁,T₂) नया पीरियोड बनता है; नहीं तो सामान्य पीरियोड नहीं मिलता।
14. ग्राफिकल ट्रांसफ़ॉर्मेशन
- शिफ्ट: y = f(x‑a) → बाएँ a इकाई, y = f(x)+b → ऊपर b इकाई।
- रिफ्लेक्शन: y = –f(x) (x‑अक्ष), y = f(‑x) (y‑अक्ष)।
- स्केलिंग: y = a·f(x) (ऊर्ध्वाधर), y = f(bx) (क्षैतिज)।
- इन ट्रांसफ़ॉर्मेशन को समझने से फ़ंक्शन का पीरियोड, डोमेन‑रेंज और ग्राफ़ आसानी से बदलता है।
15. JEE‑स्तर के उदाहरण प्रश्न और समाधान
- डोमेन‑रेंज: f(x)= (x‑2)/(x+3)·√(9‑x) → डोमेन ((‑∞,‑3)∪(‑3,9]) , रेंज y≥0, y≠1.
- इन्भर्स: f(x)= (5x+3)/(6x‑5) → f⁻¹(x)= (x+3)/(6x‑5).
- रेंज: f(x)= x/√(x²+1) → डोमेन ℝ, रेंज (‑1,1).
- सर्जेक्टिविटी: f(x)= (2x‑3)/(x‑1) → रेंज ℝ{2} → नहीं सर्जेक्टिव।
- पीरियोड: F(x)=3 sin 2x + 4 cos x → sin 2x का π, cos x का 2π → LCM = 2π.
16. अध्ययन के टिप्स
- हर परिभाषा, उदाहरण और ग्राफ़ को नोटबुक में लिखें।
- वीडियो को पॉज़ करके स्वयं प्रश्न हल करें, फिर समाधान देखें।
- पिछले साल के JEE प्रश्नों को डोमेन‑रेंज, इन्जेक्टिव‑सर्जेक्टिव, पीरियोडिक आदि वर्गों में बाँट कर अभ्यास करें।
- ग्राफ़ बनाते समय टेबल‑फ़ॉर्म में x‑values और y‑values लिखें, फिर बिंदु जोड़ें; वर्टिकल‑लाइन टेस्ट से तुरंत फ़ंक्शन की वैधता जाँचें।
17. अतिरिक्त संसाधन
- प्रैक्टिस बुक: "IIT JEE Mathematics – 2024" (पुस्तक) – विस्तृत फ़ंक्शन‑प्रश्न और हल।
- ग्राफ़िंग टूल: "TI‑84 Plus CE" ग्राफिंग कैलकुलेटर – फ़ंक्शन के ग्राफ़ को तुरंत देख कर वर्टिकल‑लाइन टेस्ट, पीरियोड आदि लागू करने में मदद।
- समीक्षा गाइड: "Mathematics for JEE Advanced – Arihant" – फ़ंक्शन, डोमेन‑रेंज, greatest‑integer, इन्भर्स और पीरियोडिक फ़ंक्शन पर संक्षिप्त सारांश।
फ़ंक्शन की डोमेन‑रेंज, इन्जेक्टिव‑सर्जेक्टिव गुण, इन्भर्स, कंपोज़िट और पीरियोडिक व्यवहार को पूरी तरह समझना गणितीय समस्या‑समाधान की नींव है; इन सिद्धांतों को ग्राफ़िकल टेस्ट और नियमित अभ्यास के साथ लागू करने से आप JEE‑Main/Advanced के सभी फ़ंक्शन‑आधारित प्रश्नों को आत्मविश्वास के साथ हल कर पाएँगे।
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1. फ़ंक्शन क्या है?
- **परिभाषा**: दो सेट A और B के बीच ऐसा नियम जिससे प्रत्येक a∈A को ठीक एक b∈B से जोड़ा जाता है (एक‑से‑एक मैपिंग)। - दो शर्तें: (i) हर a का बाइंडिंग, (ii) यूनिकनेस। - लिखावट: f:A→B या f(a)=b.
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