भारत की लुक ईस्ट, एक्ट ईस्ट और लुक वेस्ट नीतियों का विस्तृत विश्लेषण

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परिचय

भारत ने 1990 के दशक से अपनी विदेश नीति को पुनः दिशा देने के लिए विभिन्न क्षेत्रीय रणनीतियों को अपनाया है। इन रणनीतियों में प्रमुख हैं – लुक ईस्ट नीति, एक्ट ईस्ट नीति और लुक वेस्ट नीति। यह लेख इन नीतियों के इतिहास, प्रमुख माइलस्टोन, उपलब्धियों और अंतर को विस्तार से प्रस्तुत करता है।

लुक ईस्ट नीति (Look East Policy)

  • आरंभ: 1990 में पी.वी. नरसिंह राव द्वारा लॉन्च की गई।
  • पृष्ठभूमि: सोवियत संघ के विघटन के बाद भारत ने आर्थिक विकास के लिए ईस्ट और साउथ‑ईस्ट एशिया पर ध्यान केंद्रित किया।
  • मुख्य उद्देश्य: आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देना, चीन के प्रभाव को संतुलित करना।
  • प्रमुख माइलस्टोन:
  • 1992: एशियान का सेक्टरल पार्टनर
  • 1996: एशियान का डायलॉग पार्टनर
  • 2002: एशियान का समिट लेवल पार्टनर
  • 2003: ट्रीटी ऑफ एमटी एंड कोऑपरेशन इन साउथ ईस्ट एशिया (TACC) पर हस्ताक्षर
  • 2009: एशियान के साथ काउंटर‑टेररिज्म डिक्लेरेशन
  • 2010‑2015: फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTAs) – वस्तु एवं सेवा दोनों के लिए
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स:
  • काला दन मल्टीमॉडल ट्रांजिट प्रोजेक्ट (इंडिया‑म्यानमार)
  • त्रिपक्षीय हाईवे (इंडिया‑म्यानमार‑थाईलैंड)
  • राईडम रोड प्रोजेक्ट (इंडिया‑म्यानमार)
  • साइडलाइन सहयोग:
  • मैकन‑गंगा कोऑपरेशन (2000) – सांस्कृतिक, शैक्षिक, पर्यटन, परिवहन पर फोकस, लेकिन नियमित मीटिंग्स न होने के कारण सीमित सफलता।
  • BIMSTEC (1997) – बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल, श्रीलंका, म्यानमार, थाईलैंड के बीच बहु‑क्षेत्रीय सहयोग, जिसे "मिनी सार्क" भी कहा जाता है।

एक्ट ईस्ट नीति (Act East Policy)

  • आरंभ: 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च किया गया।
  • मुख्य सिद्धांत (चार C): Culture, Commerce, Connectivity, Capacity Building.
  • नया फोकस:
  • आर्थिक सहयोग के साथ साथ रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग को भी शामिल करना।
  • उत्तर‑पूर्व भारत को नीति में सम्मिलित करना, जिससे इस क्षेत्र की बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिले।
  • चीन, जापान, कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, मंगोलिया आदि देशों के साथ विस्तृत सहयोग।
  • भेद:
  • लुक ईस्ट केवल आर्थिक सहयोग पर केंद्रित थी, जबकि एक्ट ईस्ट में रक्षा, सुरक्षा और सांस्कृतिक संबंधों को भी प्रमुखता मिली।
  • लुक ईस्ट में उत्तर‑पूर्व भारत को उपेक्षित किया गया, जबकि एक्ट ईस्ट में इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी गई।
  • उदाहरण:
  • भारत‑श्रीलंका, भारत‑म्यानमार, भारत‑बांग्लादेश में सड़क एवं पोर्ट परियोजनाएँ।
  • सांस्कृतिक एवं भाषा‑समानता पर आधारित सहयोग (जैसे मैकन‑गंगा के पुनरुद्धार की संभावनाएँ)।

लुक वेस्ट नीति (Look West Policy)

  • आरंभ: 2005 (मनमोहन सिंह सरकार) – शुरुआती चरण में सीमित उपलब्धि।
  • लक्षित क्षेत्र: मध्य‑पश्चिम एशिया (गुलेफ़, ईरान, इज़राइल, सऊदी अरब, कुवैत, क़तर, यूएई)।
  • महत्व:
  • भारत की 60% तेल आय इस क्षेत्र से आती है; इसलिए ऊर्जा सुरक्षा के लिए यह अत्यंत आवश्यक है।
  • लगभग 10 मिलियन भारतीय विदेश में काम करते हैं, जिनकी रेमिटेंस लगभग $80 बिलियन है, जिसमें 56% मध्य‑पश्चिम एशिया से आती है।
  • यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है (अमेरिका और चीन के बाद)।
  • परिवर्तन:
  • पहले ये देश "प्रो‑पाकिस्तान" माने जाते थे, लेकिन अब वे पेट्रो‑स्टेट नहीं रहे; रियल एस्टेट, वित्तीय सेवाएँ, विविधीकृत अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं।
  • सामाजिक सुधार (महिला अधिकार, धार्मिक सहिष्णुता) ने भारत के साथ संबंधों को अधिक अनुकूल बना दिया।
  • राजनीतिक कदम:
  • 2015 में प्रधानमंत्री मोदी की मध्य‑पश्चिम यात्रा (इज़राइल, यूएई, सऊदी अरब) – उच्च स्तर के सम्मान और आर्थिक समझौते।
  • 2017‑2019 में इज़राइल और यूएई के साथ कई द्विपक्षीय समझौते, जिसमें तेल‑रिफाइनरी निवेश ($44 बिलियन) और पोर्ट विकास (चाबहार पोर्ट) शामिल हैं।
  • 2019 में भारत को OIC (ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन) की बैठक में आमंत्रित किया गया, जबकि पाकिस्तान ने बायकट किया – यह भारत की लुक वेस्ट नीति की सफलता को दर्शाता है।

लुक ईस्ट, एक्ट ईस्ट और लुक वेस्ट नीतियों की तुलना

पहलूलुक ईस्टएक्ट ईस्टलुक वेस्ट
लॉन्च वर्ष199020142005
मुख्य फोकसआर्थिक सहयोगआर्थिक + रणनीतिक/सुरक्षाऊर्जा + व्यापार + मानवीय संबंध
प्रमुख क्षेत्रदक्षिण‑पूर्व एशियादक्षिण‑पूर्व एशिया + चीन, जापान, कोरिया, ऑस्ट्रेलियामध्य‑पश्चिम एशिया (गुलेफ़)
उत्तर‑पूर्व भारतउपेक्षितप्रमुख (कनेक्टिविटी)सीमित
रक्षा सहयोगनहींहाँ (काउंटर‑टेररिज्म, सुरक्षा समझौते)सीमित, मुख्यतः ऊर्जा सुरक्षा

निष्कर्ष

भारत की विदेश नीति ने 1990 के बाद से क्रमशः लुक ईस्ट, एक्ट ईस्ट और लुक वेस्ट के माध्यम से अपने आर्थिक, रणनीतिक और सुरक्षा हितों को विविधीकृत किया है। लुक ईस्ट ने एशियान के साथ बुनियादी आर्थिक बंधन स्थापित किए, जबकि एक्ट ईस्ट ने इन बंधनों को सुरक्षा और सांस्कृतिक आयाम तक विस्तारित किया और उत्तर‑पूर्व भारत को कनेक्टिविटी का केंद्र बनाया। लुक वेस्ट ने ऊर्जा सुरक्षा, रेमिटेंस और निवेश के माध्यम से मध्य‑पश्चिम एशिया को भारत के रणनीतिक साझेदारों में शामिल किया, जिससे भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत हुई। इन नीतियों का सामूहिक प्रभाव भारत को एक बहु‑ध्रुवीय विश्व में अधिक प्रभावशाली और आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाता है।

लुक ईस्ट, एक्ट ईस्ट और लुक वेस्ट नीतियों ने मिलकर भारत को आर्थिक, रणनीतिक और सुरक्षा के तीनों मोर्चों पर विविध साझेदारियों की ओर अग्रसर किया है, जिससे भारत की वैश्विक भूमिका मजबूत हुई है।

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