इंस्टीट्यूशन्स का कार्य और भारतीय लोकतंत्र में उनकी भूमिका
परिचय
इस लेख में हम क्लास 12 के सामाजिक विज्ञान के "वर्किंग ऑफ इंस्टीट्यूशंस" अध्याय को संक्षेप में समझेंगे। यह अध्याय बताता है कि भारत में विभिन्न संस्थाएँ—संसद, कार्यपालिका, न्यायपालिका—कैसे मिलकर कानून बनाती, लागू करती और विवादों को सुलझाती हैं।
ऑफिस मेमोरेंडम और आरक्षण का इतिहास
- 1990 में एक सरकारी आदेश (ऑफिस मेमोरेंडम) जारी हुआ, जिसमें सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (बैकवर्ड क्लासेस) को सिविल सेवाओं में 27% आरक्षण देने की बात की गई।
- इस आदेश के पीछे कई संस्थाओं की भागीदारी थी: संसद ने बिल पारित किया, प्रधानमंत्री और कैबिनेट ने इसे मंजूरी दी, राष्ट्रपति ने असेंट दिया, और न्यायपालिका ने इसकी वैधता की पुष्टि की।
- बाद में 1993 में संशोधित आदेश जारी हुआ, जिससे आरक्षण को कानूनी रूप दिया गया।
मंडल आयोग की भूमिका
- 1979 में द्वितीय बैकवर्ड क्लास कमीशन (मंडल आयोग) स्थापित हुआ, जिसका मुख्य कार्य पिछड़े वर्गों की पहचान और उनके उन्नयन के लिए सिफ़ारिशें देना था।
- आयोग की प्रमुख सिफ़ारिश 27% आरक्षण थी, जिसे बाद में सरकार ने अपनाया।
- यह दिखाता है कि कैसे एक आयोग (समीक्षा संस्था) की रिपोर्ट से नीति बनती है और फिर वह नीति विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से लागू होती है।
राजनीतिक संस्थाएँ: संसद, कार्यपालिका, न्यायपालिका
संसद (लेजिस्लेटर)
- दो सदनों से मिलकर बनी: लोकसभा (निचला सदन, 543 सदस्य, सीधे चुनाव) और राज्यसभा (ऊपरी सदन, 245 सदस्य, अप्रत्यक्ष चुनाव)।
- प्रमुख कार्य: कानून बनाना, बजट पारित करना, सरकार को नियंत्रण देना।
- लोकसभा में बहुमत वाली पार्टी या गठबंधन ही प्रधानमंत्री को चुनती है; यदि बहुमत नहीं, तो कोलिशन सरकार बनती है।
कार्यपालिका (एक्जीक्यूटिव)
- प्रधानमंत्री और कैबिनेट: नीति निर्धारण, कानून का कार्यान्वयन, विभिन्न मंत्रालयों का नेतृत्व।
- दो प्रकार के एक्जीक्यूटिव:
- राजनीतिक एक्जीक्यूटिव – प्रधानमंत्री, मंत्री, जो जनता द्वारा चुनी गई पार्टी के सदस्य होते हैं और सीमित अवधि के लिए पद धारण करते हैं।
- स्थायी एक्जीक्यूटिव – सिविल सेवक (IAS, IPS आदि) जो मेरिट के आधार पर नियुक्त होते हैं और सरकार बदलने पर भी अपनी पदस्थता बनाए रखते हैं।
न्यायपालिका (जुडिशरी)
- सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, जिला न्यायालय – सभी स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं।
- मुख्य कार्य: संविधान की व्याख्या, कानून की वैधता जांच, नागरिक‑सरकार के बीच विवाद निपटाना।
- न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए जजों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की सलाह पर की जाती है, और उन्हें हटाने के लिए विशेष प्रक्रिया (इम्पीच) अपनाई जाती है।
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की शक्ति
- प्रधानमंत्री: वास्तविक (रियल) शक्ति रखता है – नीति बनाना, संसद में बहुमत के आधार पर सरकार चलाना।
- राष्ट्रपति: औपचारिक (नॉमिनल) शक्ति – कानून पर असेंट देना, अंतरराष्ट्रीय समझौते पर हस्ताक्षर, सेना का सर्वोच्च कमांडर। लेकिन राष्ट्रपति का कार्य केवल प्रधानमंत्री और कैबिनेट की सलाह पर ही होता है।
कार्यपालिका और विधायी के बीच शक्ति संतुलन
- संसद कानून बनाती है, कार्यपालिका उसे लागू करती है, न्यायपालिका उसकी वैधता जांचती है।
- यदि कोई कानून असंवैधानिक पाया जाता है, तो न्यायपालिका उसे रद्द कर देती है (जुडिशियल रिव्यू)।
- यह त्रि‑संस्थात्मक प्रणाली लोकतंत्र में चेक‑एंड‑बैलेंस का मूल आधार है, जिससे निरंकुशता से बचा जा सके।
निष्कर्ष
भारत में विभिन्न संस्थाएँ – संसद, कार्यपालिका, न्यायपालिका, आयोग और आयोग‑आधारित समितियाँ – मिलकर शासन की जटिल प्रक्रिया को संचालित करती हैं। प्रत्येक की अलग‑अलग जिम्मेदारियाँ और शक्तियाँ हैं, लेकिन सभी का सहयोग ही लोकतांत्रिक शासन को स्थिर और प्रभावी बनाता है।
संसद, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संतुलित सहयोग ही भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ है; यह समझना आवश्यक है कि कैसे एक सरकारी आदेश से लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक, सभी संस्थाएँ मिलकर जनता के हित में कार्य करती हैं।
Frequently Asked Questions
Who is Digraj Singh Rajput on YouTube?
Digraj Singh Rajput is a YouTube channel that publishes videos on a range of topics. Browse more summaries from this channel below.
Does this page include the full transcript of the video?
Yes, the full transcript for this video is available on this page. Click 'Show transcript' in the sidebar to read it.
Helpful resources related to this video
If you want to practice or explore the concepts discussed in the video, these commonly used tools may help.
Links may be affiliate links. We only include resources that are genuinely relevant to the topic.